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Rajasthan Sikhs Team

राजस्थान के सिक्खों के  लिए अलग गुरुद्वारा कमेटी एवं गुरुद्वारा एक्ट की आवश्यकता क्यों ..?
By SuperAdmin

राजस्थान के गुरूद्वारे क़ानूनी रूप से SGPC के दायरे में नही आते



पंजाब से सटे राजस्थान राज्य में 15 लाख के लगभग सिख एवं 1 करोड़ के लगभग नानक नाम लेवा अनुयायी है जो कि अपने पूर्वजो के समय से सिक्ख धर्म से जुड़े हुए है जिनमे अरोड़ा , बनिया , सिन्धी , ब्राह्मण , जाट , मूल निवासी (दलित ) एवं मुस्लिम भाईचारे के लोग शामिल है जो कि आज भी गुरुनानक देव जी को पूजते है राजस्थान में तीन सिक्ख गुरुओ गुरुनानक देव दूसरी उदासी के समय , गुरू गोबिंद सिंह नांदेड़ प्रवास , एवं गुरु हरगोबिन्द जी के ग्वालियर के लिए से रिहा होकर आना का आगमन हुआ है इसके इलावा भक्त धन्ना जी , भक्त रविदास जी , दादू द्वारा , भक्त पीपा जी , बाबा सुखा सिंह महिताब सिंह के इतिहास को मिलाकर अब तक 15 इतिहासिक स्थान सिख इतिहास पर दर्ज हो चुके है परन्तु सबसे बड़े प्रान्त में नानक नाम लेवा संगत के छोटे छोटे हिस्सों में बसे होने के कारण इन स्थलों की सार सभाल नही हो पा रही इसके इलावा अनेको ऐसे स्थान शेष है जिनको इतिहास के नजरिये से खोज कर दुनिया की हिस्ट्री में महत्वपूर्ण स्थान मिल सकता है जिनमे गुरु गोबिंद सिंह जी के दक्ष्ण प्रवास के दोरान 500किलोमीटर के दोरान तय रस्ते में अनेको स्थान शामिल हो सकते है इसी प्रकार गुरु गोबिंद सिंह जी से संथ्या प्राप्त करने वाले राजस्थान के राज घराने जिनमे राजा जय सिंह एवं विजय सिंह शामिल थे इनके बारे में भी महतवपूर्ण इतिहास हमारे पास नही है पुष्कर में स्थित इतिहासिक गोबिंद घाट को तोड़कर गौ घाट बना दिया गया इसी बीच तस्सली की बात है कि सिख इतिहास को राजस्थान से जोड़ने वाली बुढा जोहड़ की भागसर झील को हरदीप सिंह डिबडिबा के प्रयासों से राजस्थान के टूरिज्म विभाग से पहचानकर इस पर कार्य करने का मन बनाया है इसके लिए राज्य सरकार ने बजट भी पास किया है राजस्थान के सिक्खों को एक प्लेटफार्म पर इकठा करने हेतु एवं उनके सामाजिक , राजनेतिक ,आर्थिक एवं सामाजिक हितो के रक्षार्थ राजस्थान सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी , श्री गंगानगर का गठन 2003 में किया गया था जिसने 2004 में राजस्थान का भ्रमण करके सिक्खों मसलो को हल करने के साथ साथ श्री गंगानगर से झालावाड , कोटा , अजमेर पुष्कर तक धर्म प्रचार की लहर चलाई , 2005 में गुरमत समागम एवं सेमिनार करवाए २००३ में राजस्थान के सिख इतिहास में पहली वार पांचो तख्तो के जथेदार पांच प्यारो के ररूप में अमृतपान करवाके गये जिनमे650 एवं 1300 सिक्खों में अमृतपान किया , सिक्ख धर्म के अभिन्न अंग सिकलीघर सिखों , बंजारों सिखों, के उत्थान के लिए कार्य किये गये इसके अलावा आर्थिक , राजनेतिक हितो की रक्षा हेतु कदम उठाये गये , पंजाबी भाषा , पंजाबी भाषा अकादमी के गठन , अल्पसंख्यक के दोरान मिलने वाली सहुल्तो , पंजाब से मिलने वाले गंदे पानी , गंगनहर जैसे मुद्दे कमिटी द्वारा समय समय पर उठाये गये बुढा जोहड़ गुरुद्वारा के पैतृक ट्रस्ट को संगत के सहियोग से भंग करवाके आम सहमति से सिख संगत की कमेटी बनाई गयी , बुढाजोहड़ झील को ग्रामीण प्रोजेक्ट के तहत स्वीक्रत करवाकर जल्दी निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा , इसी स्थान पर श्री गुरु ग्रन्थ साहिब विद्या केंदर की स्थापना करने हेतु जमीन खरीद ली गयी है इसके बावजूद भी राजस्थान में बहुत कार्य शेष है जिसके लिए हमे एक प्लेटफार्म पर आना पड़ेगा राजस्थान गुरुद्वारा एक्ट की स्थापना एवं राजस्थान की गुरुद्वारा कमेटी की स्थापना – वर्तमान में राजस्थान के गुरूद्वारे एवं सिख सविधानिक तौर पर किसी भी कमेटी एवं एक्ट के अंतर्गत नही आते है शिरोमणि गुरुद्वारा कमेटी अमृतसर सिर्फ पंजाब , चंडीगढ़ , हिमाचल तक सिमित है जबकि दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी सिर्फ गुरुद्वारों के सार सभाल हेतु , जिसके कारण उन जगहों पर सिख गुरुद्वारों की सम्पति को कब्ज़ा करने की कोशिश हो रही है यहाँ पर सिख एवं पंजाबी आबादी नही है यां फिर कम है जैसे पोकरण जैसलमेर , सुहावा साहिब चुरू , गुरुद्वारा साहिब महाजन , जबकि पुष्कर के गुरुद्वारा गोबिंद घाट को वर्षो पहले गौघाट में बदल दिया गया , राजस्थान में पंजाबी भाषा को ख़त्म करने की कोशिश हुई है , पिछले कुछ वर्षो में अनेक ऐसी घटनाये हुई है जिनसे हमे यह लगता है कि राजस्थान की अपनी गुरुद्वारा कमेटी होनी चाहिए जोकि राजस्थान के गुरुद्वारों की सभाल कर सके , राजस्थान के इतिहास में सिक्खों की भूमिका को इतिहासिक खोज द्वारा विश्व के सामने रख सके , राज्य सरकार एवं केंदर सरकार के समक्ष उन मुद्दों को रख कर हल करवाए जो कि राजस्थान के नानक नाम लेवा के आर्थिक ,सामाजिक , राजनितिक हितो से जुड़े हो , धर्म प्रचार के इक्सुरता लाकर सिक्ख धर्म से नानक नाम लेवा संगत एवं दलित सिक्खों को जोड़ा जाये , आर्थिक रूप से गरीब सिक्खों की मदद की जाये शिरोमणि कमेटी की तर्ज पर राजस्थान में राजस्थान कमेटी द्वारा निशुल्क शिक्षा , मेडिकल की सहुलते दी जाये , पाकिस्तान , बांग्लादेश के इतिहासिक गुरुधामो के दर्शन करवाए जा सके , श्री अमृतसर में राजस्थान कमेटी द्वारा अपने खर्चे से यात्री निवास बनाया जायेगा जिससे राजस्थान के यात्रियों को दरबार साहिब की यात्रा के दोरान परेशानी न उठानी पड़े , खालसा साजना दिवस पर आप सभी राजस्थान वासियों को लाख लाख वधाई देते हुए उम्मीद करता हूँ कि आप सभी मेरी इन निवेदनो पर ध्यान देकर राजस्थान गुरुद्वारा कमेटी के गठन में हमारा साथ दोगे प्रो बलजिंदर सिंह मोरजण्ड , महासचिव राजस्थानी सिख एजुकेशनल एवं वेलफेअर कमेटी , श्री गंगानगर 51-H BLOCK , SRI GANGANAGAR WWW.RAJSTHANSIKHS.COM EMAIL- RAJSTHANSIKHS@GMAIL.COM

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